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अपने दिमाग को नियंत्रित केसे करे

हमारे आजूबाजू ऐसे कई लोग होते है जो सफर होते है ओर कई ऐसे लोग भी होते है जो सफर नही होते! – ऐसा क्यू आपको मालूम है, ये सारा खेल दिमाग का है। + जो सफर लोग होते है उनके बस मे उनका दिमाग होता है ओर जो सफर नहीं होते वो दिमाग के बस मे होते है। इसका मतलब मे समजाता हु,

आपको पढ़ाई करनी है या तो फिर कोई काम करना हो ओर वो जरूरी है लेकिन आपको वो काम करने मे आलस आता है ओर आप उस काम को खतम नही करते ओर आपका वो काम अधूरा रह जाता है + इसका मतलब है की आप अपने दिमाग के बस मे है, आपके दिमाग ने आपसे कहा ही ये काम नही करना जिसके वजे से आपको आलस आने लगी। / ओर दूसरी बाजू जब आपका दिमाग आपके बस मे होता है तब आप अपने दिमाग को कहते हो की ये काम मुजे करना है – जिसके वजे से आपको आलस नही आती ओर आपका काम भी खतम हो जाता है। ” चलो इसे ज्यादा आसानी से ओर सरलता समजते है,

जब तक आप अपने आप को अपने मन के नियंत्रण मे रहने दोगे = तब तक आप को वो control करता रहेगा / आपको नाच नचाता रहेगा।

=> एक बात कहता हु जो आपको-मुजे-सबको मालूम ही है की मन को कभी control नही कर सकते। ये काम होही नही सकता, आप जितना मन को नियंत्रण करने जाओगे वो उतना आपसे दूर भागेगा (इस बात के उपर मुजे एक कहानी याद आ रही है जो मे दूसरी post मे आपको सुनौगा ओर उसकी link मे यहा add कर दूंगा।)। = तो मे बोलता हु की हमे मन को नियंत्रित करना ही नही है! (अरे रुको रुको भाई मे समजाता हु – आप ऐसा मत सोचो की भाविन क्या बोलता जा रहा है। – थोड़ी शान्ति रखो आप सब समज जाओगे।)

चलो सबसे पहले हम भगवान श्री कृष्ण की बात सुनते है की उन्होने मन के बारे मे क्या कहा है, उन्होने कहा है की आपका शरीर एक रथ के जेसा है, उस रथ को चलाने वाले साथी का नाम है आपका मन, उस रथ मे जे बेथा हुआ है – जो उस रथ का मालिक है वो आप है। + इस बात मे देखने से पता चलता है की आप ओर आपका मन/दिमाग आप नही हो – वो आपसे अलग है।

दिक्कत ये है की रथ चलाने वाला ही आपको इधर-उधर ले जा रहा है – बिना आपसे पूछे। (तो यहा मालिक आपका मन हो गया।) + लेकिन ये जो मन है ना / ये जो रथ चलाने वाला है ना वो आपको कभी मना करही नही सकता – आप जेसा बोलोगे वेसा ही आपका सारथी / मन करेगा + लेकिन आप कभी अपने सारथी / मन को कुछ कहते ही नही हो।

मेने पहले कहा थाना की आपका मन कभी नियंत्रण / control नही हो सकता – तो आप सोच रहे होंगे की भाविन जो बात कह रहा है वो तो सही है लेकिन मन नियंत्रित होही नही सकता तो हम करे क्या? = सबसे पहले ये याद रखो की आप ओर आपका दिमाग अलग है, तो इसका मतलब ये है की एक-दूसरे को देख सकता है। तो आपको बस करना इतना ही है की आपको अपने मन को observe करो – मन का निरीक्षण करो।

मन को समजना है की आपका मन आपको केसे control करता है, दिमाग की हरकतो को देखोगे तो वो खुद्ब्खुद ही control हो जाती है। ओर फिर आप जो कहोगे वो आपका मन करेगा।

चलो एक छोटा सा उदाहरण देता हु, जेसे कोई छोटा बच्चा कुछ खेल रहा हो तो आप उस छोटे बच्चे के बाजू मे जा कर खड़े हो जाओ ओर उस बच्चे को देखो की वो क्या कर रहा है (ऐसा करने से) थोड़ी देर के बाद वो छोटा बच्चा अपने आप ही उसका काम (खेल) बन कर देगा ओर आपको देखने लगेगा। + वेसे ही अपने मन को देखने पर वो भी अपनी हरकते बन कर देता है ओर आपकी बात सुनने लगता है – फिर आप अपने दिमाग को जेसा बोलते हो वेसा ही आपका दिमाग करेगा।

चलो एक और बात लेते है पढ़ाई की, कभी आप पढ़ने बेथते हो ओर आपके दिमाग को पढ़ने का मन नही है तो आप वही बेथ कर अपने दिमाग को देखो की इसे (दिमाग) पढ़ने का मन नही है- क्यू नही है? पूछो – तो इस वक्त आप अपने दिमाग से अलग रहते हो ओर अपने दिमाग को देखने लगते हो। जब आप अपने दिमाग से पूछोगे की क्यू भाई क्यू पढ़ने का मन नही है तो जवाब मे कुछ भी नही आएगा + बस येही समय आपको बोलना है की अगर कोई जवाब नही है तो पढ़ने बेथते है।

ऐसा धीरे धीरे करने से- कोई भी वक्त क्यू ना हो लेकिन आपका मन आपकी बात सुनेगा।

एक दूसरा उदाहरण लेता हु (observe शब्द के उपर) की कोई इंसान gym करता है तो थोड़े समय के बाद वो खुद को आईने मे देखता है ओर समजता ओर बोलता है की left वाला tricep थोड़ा कम है चलो अब इसकी थोड़ी ज्यादा exercise करुगा – biceps अगर कम हो तो उसके बारे मे सोचता है! ये मे क्यू बोल रहा हु आपको मालूम है, जेसे उस इंसान ने आईने मे अपनी बॉडी को देखा ओर समजा की मेरा left tricep कम है – अगर वो देखता ही नही तो वो समज भी नही पाता। = वेसे ही हमे भी हमारे मन को देखना है उसके बाद हम हमारे मन को समज पाएंगे ओर फिर उसे सही तरह से सही रास्ते पर लाकर उसके पास से काम करवा कर हम सफर हो जाएंगे।

* छोटे मे समजाउ तो आपको हर वक्त अपने आपको देखना है की आपका दिमाग आपको कहा ले जा रहा है। अगर आपको किसी वक्त लगे की नही नही ये मुजे गरत रास्ते पर ले जा रहा है तो उसी वक्त उसे रोको। जब आप अपने दिमाग से अलग हो कर उसे देखते हो तो आप अपने दिमाग को तुरंत रोकने मे कामयाप रहोगे।

मेरी बात यहा खतम होती है, आपको आज के टॉपिक के बारे मे कुछ बोलना हो तो कमेंट करे ओर सभी के सामने अपनी बात रखे। आप सभी को मेरे तरफ से ” जय द्वारकाधीश “!

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