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आरती से जुड़ी 2 खास बात

” आरती ” – यह एक ऐसी चीज़ है जो सबको करनी पसंद आती है। जो भी इंसान हो जेसा भी इंसान हो उसे भक्ति करने का ज्यादा मन ना भी क्यू ना होता हो लेकिन अगर घर में यातो मंदिर में आरती हो रही हो तो वो उस आरती है भाग लेता ही है। ओर मुझे लगता है की आरती ही एक ऐसी चीज़ है जिसमे हम भगवान से जबसे जल्दी ओर आसानी से जुड़ते ( connect ) है ओर उनका आशीर्वाद पा सकते है। = आरती करने से हमारी और उनकी ऊर्जा का संपर्क होता है।

ऊर्जा की बात आई है तो चलो सबसे पहले मैं आपको आरती करते समय हम जिस प्रकार से आरती करते है उसके पीछे का कारण बताता हु,

1 – आरती करते समय हम गोल-गोल ” 〇 ” आरती करते है ( circular motion ) ओर हम साथ में infinity sign ” ∞ ” में भी आरती उतारते है, चलो इसके बारे में मैं आपको कुछ बताता हु।

हमारा शरीर 5 तत्वो से बना होता है – ” आकाश, पृथ्वी, पानी, अग्नि, वायु “। जिसमे एक तत्व आकाश है, आकाश का मतलब है आपके शरीर के बाहर शरीर से जुड़ी हुई energy field होती है जिसे Aura भी कहा जाता है, जिसका आकार circle मतलब की गोल होता है ओर science के देखने के आधार से infinity sign ‘∞’ में भी होता है।

हमारे पुराने गुरु, पूर्वजो को मालूम था की एक जेसी ऊर्जा आसानी से साथ में मिलती है। – भगवान की ऊर्जा भी हमारे जेसी ही होती है। भगवान खुद भी एक ऊर्जा है इंग्लिश की भाषा मे उसे Aura कहते है तो उनका Aura भी हमारे Aura जेसा ही होता है मतलब की उनकी मूर्ति का Aura का आकार circle, infinity ओर कई आकार के होते है।

हम circle ओर infinity के आकार में ही उनकी आरती उतारते है। हमारी भाषा मे बोलू तो, आरती करते समय हम circle ओर infinity का symbol track कर रहे है। = उनके आकाश तत्व ओर आपके आकाश तत्व के बीच मतलब की उनकी ऊर्जा और आपकी ऊर्जा के बीच में अग्नि है मतलब की आरती है जो आपकी ऊर्जा को उनके ऊर्जा से connect करने का काम करती है।

2. दोपहर को आरती – पूजा क्यो नहीं करनी चाहिए

दोस्तो मैं पहले ही कहदु कई जगे पर 12 बजे से पहले यातो 12 बजे के आजू बाजू आरती-पूजा की भी जाती है। : लेकिन हम scientifically ओर spiritually समझते है की दोपहर को आरती – पुजा क्यों नहीं करनी चाहिए और क्यू नहीं होती।

हम सुबह और शाम को ही क्यू पूजा करते है। : सुबह-दोपहर-शाम यह समय धड़ी के तीन समय होते है और सब समय की अलग अलग ऊर्जा होती है। सुबह उगते सूर्य की ऊर्जा होती है, शाम को शीतरता जिसमे सूर्य डूबा हुआ होता है जिनमे तापमान शांत होता है लेकिन दुपहर को सूर्य आशमान में होता है और तापमान भी गरम होता है।

हमारे शरीर में उष्णा होती है यानि कि गर्माहट। जेसे की हमने उपर ऊर्जा की बात की थी = आरती-पूजा करते समय हमारे शरीर कि energy बढ़ने लगती है और जब हमारे शरीर कि energy बढ़ती है तो हमारे शरीर कि उष्णा यानि कि गर्मी भी बढ़ने लगती है।

और जब आरती – पूजा करते समय आपकी अंडर रही गर्मी बढ़ती है और बाहर का तापमान भी गरम होता है और इसकी वजह से यह आपके health के लिए थोड़ा सा beneficial नहीं है। इसे science में cellular damage कहा जाता है।

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